मध्य प्रदेश और महिला सशक्तिकरण
इसमें संशय नहीं की मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रो और तबकों में महिलाओं की स्थिति देश के कुछ क्षेत्रों से काफी सम्मानजनक और संतुष्टिदायक है किन्तु मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा आज भी ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण है, जहाँ समाज की संरचना काफी हद तक परंपराओं पर आधारित है। यहाँ महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक घर की चारदीवारी तक सीमित रही। शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और आर्थिक भागीदारी महिलाएं उपेक्षित हैं,
मध्य प्रदेश की एक बड़ी महिला आबादी आदिवासी समुदायों से आती है। इनके सामने चुनौतियाँ दोहरी हैं—एक महिला होने की और दूसरी सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन की। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुँच इनके लिए अभी भी कठिन है।
कई परिवारों में आज भी लड़की का जन्म समस्या और चुनौतियों का जन्म ही माना जाता है। बाल विवाह, कम उम्र में माँ बनना, घरेलू हिंसा और अशिक्षा जैसी समस्याएँ महिलाओं की प्रगति में बड़ी बाधाएँ रही हैं। कुछ आँकड़े यह बताते हैं कि मध्य प्रदेश में लंबे समय तक महिलाओं में एनीमिया, मातृ मृत्यु दर और स्कूल छोड़ने की दर चिंता का विषय रही है। इन सभी समस्याओं के हल की पहली सीढ़ी इनकी शिक्षा और जागरूकता है,
आज गाँव-गाँव में स्कूल तो हैं, लेकिन चुनौतियाँ अभी भी कम नहीं हैं। कई इलाकों में माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए स्कूल दूर हैं, जिससे किशोरियों की पढ़ाई छूट जाती है। शहरी क्षेत्रों के आलावा प्रायः यही समस्या है, जिसके लिए हम ऐसी किशोरियों और बालिकाओं की शिक्षा को निरंतर रखने, उन्हें सही कोर्स से अवगत कराने और रोजगार के लिए तैयार करवाने के लिए प्रयासरत रहेंगे
जमीनी हकीकत यह भी है कि कई दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आज भी महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं मिल पातीं। जागरूकता की कमी, सामाजिक संकोच और संसाधनों का अभाव महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों को सीमित करता है। इसपर कार्य करने के लिए भी हम प्रतिज्ञाबद्ध हैं
स्कूल छोड़ना अथवा स्कूल जाना ही नहीं और शिक्षा के सभी तरह के माध्यमों में दूर रहना, शशक्त होने की जगह उपेक्षित रहना, असहाय और पीड़ित रहने के पीछे महिलाओं का दोष नहीं है बल्कि आवश्यक सुविधाओं का न होना, महिला शिक्षा के प्रयासों में कमी, मूलभूत निर्माण और शिक्षकों की कमी और सबसे अधिक प्रभावी समाज का स्वरुप, मान्यताएं और महिलाओं को कमजोर मानने की एक सोच प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, डी टी जी फाउंडेशन इन सभी दिशाओं में अपनी सहभागिता द्वारा परिवर्तन लाने को प्रयासरत हैं
- वास्तविक सशक्तिकरण
अपने पैरों पर खड़ा होना ही महिलाओं के लिए वास्तविक शशक्तिकरण है और डी टी जी फाउंडेशन का वास्तविक उद्देश्य यही है की कोई भी महिला स्वयं को दूसरों पर आश्रित न समझे बल्कि वह स्वयं की मजबूती को पहचान कर आगे बढ़े और समाज में अपनी पहचान बनाए, अपने सपनों को जिए, हमारा उद्देश्य और हमारे प्रयास इस सपने को सच करने के लिए समर्पित हैं
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