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Healthcare for All

DTG Foundation believes that achieving "Healthcare for All" requires a panoramic and an inclusive approach.

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Safety for Women

Our mission at DTG Foundation is to support these women and supporting an environment where they can thrive without any fear.

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Care for Elders

DTG Foundation believes that caring for elders goes beyond just meeting their physical needs. We aim to foster a holistic approach that addresses their emotional, social and psychological well-being.

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मध्य प्रदेश और महिला सशक्तिकरण

भारत का हृदय स्थल कहा जाने वाला मध्य प्रदेश। घने जंगल, समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरें और विविध परंपराएँ ,बाहर से देखने वालो के लिए शायद यही मध्य प्रदेश है। लेकिन इस भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान के पीछे कई कहानियां हैं, जिसमे से प्रमुख है यहाँ की महिलाओं की कहानी। एक ऐसी कहानी, जिसमें संघर्ष है, मौन पीड़ा है, लेकिन साथ ही बदलाव की आशा, आत्मनिर्भर बनने की जिद और सशक्त भविष्य की क्षमता भी है।

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विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा

बुजुर्ग हमारी पिछली पीढ़ी हैं, हमारे इस समाज रुपी पेड़ कि जड़ हैं। हम भले कितने ही आधुनिक और नयी दुनिया बना लें पर बुजुर्ग तब भी हमारी नींव हैं, आज की पीढ़ी के लिये प्रमुख चुनौतियों में से एक है हमारे बुजुर्गो को सहेज कर रखना और उनके साथ सामंजस्य बना कर उन्हें एक आरामदायक या कम से कम एक कष्ट-रहित जीवन देना है। DTG Foundation समाज के इस नींव को मजबूत बनाए रखने के लिए अपने initiative "सहेज" के माध्यम से योगदान दे रहा है, क्यूंकि जब हम अपने बुज़ुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देंगे, तभी एक संतुलित और मानवीय समाज का निर्माण हो सकेगा। नयी पीढ़ी में विनम्रता और प्रेम का बीज केवल वृद्धों कि सेवा से ही आ सकता है, जैसा कि शास्त्रों में भी कहा गया है "विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा"

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युवाओं में बेरोजगारी और जरूरी Skills की कमी

हमारा देश आज युवा शक्ति का देश है। हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा युवाओं से बना है, जो देश के भविष्य को आकार देने की क्षमता रखता है। लेकिन यह सच्चाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है कि भारतीय युवाओं की बड़ी संख्या आज शिक्षा और रोजगार के बीच फंसी हुई है। डिग्रियाँ बढ़ रही हैं, कॉलेज और विश्वविद्यालय हर साल लाखों ग्रेजुएट तैयार कर रहे हैं, फिर भी बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि युवाओं को जो शिक्षा मिल रही है, वह आज की इंडस्ट्री की वास्तविक ज़रूरतों से मेल नहीं खा पा रही है।

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भारत में स्वास्थ्य सामग्री/ सुविधाओं और दवाइयों तक लोगों की पहुंच

भारत को अक्सर उभरती हुई महाशक्ति कहा जाता है। तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में हमने बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन जब बात आम नागरिक के स्वास्थ्य की आती है, तो तस्वीर उतनी चमकदार नहीं प्रतीत होती। आज भी भारत के बड़े हिस्से में स्वास्थ्य सेवाएँ बुनियादी समस्याओं से जूझ रही हैं, जिनमें सबसे आम है स्वास्थ्य सामग्री/ सुविधाओं और आवश्यक दवाइयों की पहुंच व सर्वजन तक उपलब्धता में कमी।

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प्राथमिमिक उपचार – एक सरल और त्वरिरित समाधान

प्राथमि क उपचार यानी First Aid वह मदद है जो कि सी घायल या बीमार व्यक्ति को तुरंत दी जाती है, जब तक डॉक्टर या एम्बुलेंस नहीं पहुँचती। यह एक बहुत महत्वपूर्ण र्ण जीवन कौशल है। अगर हमें इसका सही ज्ञान हो, तो हम किसी की जान बचाने में मदद कर सकते हैं। इसलि ए हर छात्र को First Aid की बेसिक जानकारी जरूर होनी चाहिए।

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भारतीय महिलाओं में एनीमिया और रक्त की कमी

भारतीय समाज में महिलाओं को घर की धुरी माना जाता है। लेकिन विडंबना यह है कि सबकी देखभाल करने वाली महिला स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति प्रायः लापरवाह रहती है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि भारतीय महिलाओं के एक बड़े प्रतिशत में एनीमिया यानी रक्त की कमी पाई जाती है। एनीमिया केवल साधारण थकान नहीं है, बल्कि यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी की स्थिति है, जिससे शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती।

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डिजिटल ड्रग

आज हम एक ऐसी चीज़ के बारे में बात करने जा रहे हैं जो आपके हाथ में तो है, लेकिन धीरे-धीरे वह आपके दिमाग पर भी कब्ज़ा कर रही है और वह है आपका मोबाइल फोन।

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विटामिन B12 की कमी – महिलाओं की सेहत का 'साइलेंट दुश्मन'

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर थकान, कमजोरी या चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। हम इसे काम का तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि यह शरीर में विटामिन B12 (Cobalamin) की कमी का संकेत हो सकता है? यह विटामिन हमारे शरीर के लिए उतना ही जरूरी है जितना सांस लेना, क्योंकि यह DNA बनाने और नसों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

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एक सम्मानजनक और आरामदायक बुढ़ापा

बदलता समय और बुढ़ापे की सच्चाई – बुढ़ापा जीवन का एक स्वाभाविक और अनिवार्य चरण है। यह ऐसा पड़ाव है जहाँ इंसान अपने अनुभवों, यादों और जीवन की सीखों के साथ शांति से समय बिताना चाहता है। लेकिन आज के दौर में हर किसी का बुढ़ापा एक जैसा नहीं होता। जहाँ कुछ लोगों के लिए यह समय आराम, सुरक्षा और सम्मान का होता है, वहीं बहुत से बुज़ुर्गों के लिए यह चिंता, अकेलेपन और आर्थिक संघर्ष से भरा होता जा रहा है।

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भारत में मोटापे की समस्या

आज के आधुनिक समय में मोटापा केवल एक शारीरिक समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। भारत जैसे देश में, जहाँ कभी कुपोषण सबसे बड़ी समस्या माना जाता था, वहीं अब तेजी से बढ़ता मोटापा भी चिंता का विषय बन गया है। शहरों के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोटापे के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने इस समस्या को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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